Friday, 27 December 2019

गुरुत्वाकर्षण (Gravity)

गुरुत्वाकर्षण के कुछ मत्वपूर्ण प्रश्न : 

  • गुरुत्वाकर्षण क्या है - गुरुत्वाकर्षण वह आकर्षण बल है , जिस से पृथ्वी किसी वास्तु को अपनी और खींचती है। 
  • पृथ्वी के गुरुत्व के कारन ही पृथ्वी पर वायुमंडल उपस्थित है., इसी के कारन वायुमंडल के कण पृथ्वी को छोड़कर नहीं जा पते। 
  • चन्द्रमा का गुरत्वीय त्वरण (g ) का मान , पृत्वी के गुरुत्वीय त्वरण के मान का 1 /6  होता है। 
  •  पृथ्वी से चन्द्रमा की और जाने पर सरल ललक का आवर्तकाल बढ़ जाता है, क्योकि चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान घट जाता है। 
  • गुरुत्व के कारन जो त्वरण उत्पन्न होता है   उसी को गुरुत्वजनित त्वरण कहते है। तथा पृथ्वी की सतह पर इसका मान 9. 8 वर्ग  मीटर प्रति सेकंड होता है। 
  • पृथ्वी  तल से निचे या ऊपर जाने पर g  का  मान घटता है। 
  • g  का मान पृथ्वी के ध्रुव पर सर्वाधिक होता है। 
  • g  का मान विषुवत रेखा पर सबसे काम होता है। 
  • पृथ्वी की घूर्णन गति बढ़ने पर g  का मान कम होता है  और घूर्णन गति घटने पर g  का मान बढ़ जाता है। 
  • पृथ्वी के केंद्र पर g  का मान 0  होता है। 
  • यदि 2  पिंडो के बीच गुरुत्वाकर्षण बल F  है और यदि दोनों के द्रव्यमान उनके बीच की दूरी को सामान रखते हुए आधे कर दिए जाए तो गुरुत्वाकर्षण बल F /4  हो जायेगा। 
  • F =GM m/d²  में G  नियतांक  है। 
  • कोई सेब किसी वृक्ष से पृथ्वी पर गिरता है , यदि पृथ्वी द्वारा सेब पर आरोपित बल F 1  तथा सेब द्वारा पृथ्वी पर आरोपित बल F 2  है तो : दोनों बल बराबर होते है F 1 =F 2 
  • कोई लड़का डोरी से बंधे पत्थर  को किसी क्षैतिज वृताकार पथ में घुमा रहा है , यदि डोरी टूट जाए तो वह पत्थर वृत्तकार पथ पर किसी सरल रेखीय स्पर्शी  के अनुदिश गति करेगा। 

Thursday, 26 December 2019

प्रधानमंत्री मोदी ने लॉंच की नई अटल भूजल योजना





प्रधानमंत्री मोदी ने लॉंच की नई अटल भूजल योजना

केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावेड़कर के अनुसार भूजल समस्या से निपटने के  लिए नई  योजना शुरू की गई है जिसका नाम अटल भूजल  योजना रखा गया है. 
इस योजना की शुरुआत 25  दिसंबर को हुई है। 
अटल बिहारी वाजपई जी के 95 वीं  जयंती के अवसर पर इस योजना की शुरुआत हुई है। 

केंद्र सरकार ने इस योजना हेतु 6000  करोड़ रूपए आवंटित किये है 
इसमें 3000  करोड़ रूपए विश्व बैंक देगी। 
इस पूरी रकम को 5  साल में इस योजना पर खर्च करने है। 


इस योजना से उन क्षेत्रो में काम किया जाएगा जहा भूजल काफी नीचे चला गया है। इस से किसानो को भी लाभ मिलेगा। 
इस योजना से 8350  गांव लाभान्वित होंगे। 
इस योजना मे  7  राज्य शामिल हैं राजस्थान  , महाराष्ट्र , कर्णाटक , मध्यप्रदेश , उत्तरप्रदेश  , हरयाणा और गुजरात। 
इन 7  राज्यों  के  78  जिलों  मे  कुल 8350  ग्रामपंचायत  को शामिल किया गया है। 
इस योजना के तहत 2024  तक हर घर में पीने का पानी पहुंचाने  का  लक्ष्य है। 













Wednesday, 4 September 2019

computer hardware

 कंप्यूटर हार्डवेयर 
कंप्यूटर के वे भाग जिनका भौतिक स्वरूप होता है , उनको हार्डवेयर कहा  जाता है अगर सामान्य भाषा में बोले तो कंप्यूटर के वे भाग जिनको देख व छू सकते है | हार्डवेयर कहलाते है |
example - मॉनिटर , सी पी यू ,कीबोर्ड , माउस , प्रिंटर , स्कैनर आदि के अलावा भी बहुत सारे कंप्यूटर हार्डवेयर होते है
कंप्यूटर हार्डवेयर को चार भागो में बांटा गया है
1 इनपुट डिवाइस
2 आउटपुट डिवाइस
3 प्रोसेसिंग डिवाइस
4 स्टोरेज डिवाइस

  • इनपुट डिवाइस
  • वे उपकरण जो डेटा में इनपुट करवाते है | इनपुट उपकरण कहलाते है 
  • कीबोर्ड ,माउस ,स्कैनर ,वेब कैमरा ,जॉय स्टिक , ट्रैकबॉल ,टचपैड etc . इनपुट डिवाइस के उदारहण है | 
  • इनपुट डिवाइस इनफार्मेशन को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में कन्वर्ट करते है | 
  • इनपुट उपकरणों का मुख्य कार्य मनुष्य को कंप्यूटर के साथ बातचीत करवाना होता है |
  • आउटपुट डिवाइस  
  • ये उपकरण कंप्यूटर सिस्टम में इनफार्मेशन लेते है ओर ऐसे रूप में परिवर्तित कर देते है जिसे मनुष्य आसानी से समझ सकता है | उदहारण - प्रिंटर द्वारा कंप्यूटर में स्टोर किसी डॉक्यूमेंट को प्रिंट करना ताकि कोई भी इंसान उसे आसानी से समझ सके | 
  • मॉनिटर , प्रिंटर , हैडफ़ोन ,स्पीकर , टचस्क्रीन ,प्रोजेक्टर etc. आउटपुट डिवाइस के उदहारण है | 
  • प्रोसेसिंग डिवाइस 
  • ये उपकरण के कंप्यूटर के भीतर इनफार्मेशन की प्रोसेसिंग करते है | 
  • motherboard , processor , memory , प्रोसेसिंग डिवाइस के उदहारण है | 
  • स्टोरेज डिवाइस 
  • ये उपकरण कंप्यूटर के भीतर डाटा स्टोर करने का कार्य करते है | 
  • हार्ड डिस्क ड्राइव, कॉम्पैक्ट डिस्क ड्राइव इसके उदहारण है |  




BY MAHAK CHOUHAN 









Monday, 26 August 2019

इंटेलेजेंट व्यक्तियों की पहचान कैसे होती है ?

यदि आप इंटेलिजेंट है तो आप मे भी इनमे से कुछ बातों की मोजूदगी संभव है :



1. इंटेलेजेंट लोगों का सोशल सर्कल जादा बड़ा नहीं होता है . उनके दोस्त बहुत पुराने और गिने चुने ही होते हैं.असल मे आप जीतने स्मार्ट होते हैं, आप उतने ही सेलेक्टिव भी होते हैं .और बहुत सोच समझकर ही किसी से घुलते -मिलते हैं |

2.इंटेलेजेंट व्यक्ति किसी तरह की बहस या लड़ाई झगड़े से दूर रहना ही पसंद करते हैं .यही कारण है की अक्सर वे बहुत सी बातों को नजरंदाज कर देते हैं|

3. इंटेलेजेंट व्यक्ति आम तोर पर अपनी काबिलियत को कम करके आँकते हैं . वे बड़बोले नहीं होते|

4. इंटेलिजेंट व्यक्ति हर बात मे , हर घटना मे , हर चीज़ मे , पॉज़िटिव और अवसर को तलाशते हैं |

5. ऐसे लोग अक्सर ही खुद से बातें किया करते है , वे मन ही मन बहुत सारी बातों के बारे मे खुद से ही डिस्कस किया करते है |

6. इंटेलेजेंट लोग कठोर यार रूखे नहीं होते , उनके भी दिल होता है लेकिन वे दिल की बजाय दिमाग से जादा काम लेते हैं।

7. इंटेलिजेंट होने का सबसे बड़ा नुकसान ये है की बेवकूफ लोग उन्हे भी अक्सर अपने जैसा ही समझते हैं |

8. इंटेलेजेंट व्यक्तियों को क्षणिक मनोरंजन , लटके , झटके , और शोर शराबे वाली फिल्मे और गाने पसंद नहीं होते | वे यदि मॉल भी जाते है तो पहले किताबों की दुकान मे ही जाना पसंद करते हैं |

9. आमतौर पर इंटेलिजेंट व्यक्तियों की handwriting अच्छी नहीं होती | इसका कारण है की वे बहुत तेजी से सोचते हैं लेकिन उतनी ही तेजी से लिख नहीं पाते , इसलिए handwriting बिगड़ जाती है |

Sunday, 2 June 2019

अश्वगंधा कमाल की औषधि है , Ashvgandha k benifits

*अश्वगंधा : कमाल की औषधि है*
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विश्व में विदानिया कुल के पौधे स्पेन, मोरक्को, जोर्डन, मिश्र, अफ्रीका, पाकिस्तान, भारत तथा श्रीलंका, में प्राकृतिक रूप में पाये जाते है। भारत में इसकी खेती 1500 मीटर की ऊँचाई तक के सभी क्षेत्रों में की जा रही है। भारत के पश्चिमोत्तर भाग राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उ0प्र0 एंव हिमाचल प्रदेश आदि प्रदेशों में अश्वगंधा की खेती की जा रही है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में अश्वगंधा की खेती बड़े स्तर पर की जा रही है। अश्वगंधा एक द्विबीज पत्रीय पौधा है। जो कि सोलेनेसी कुल का पौधा है। सोलेनेसी परिवार की पूरे विश्व में लगभग 3000 जातियाँ पाई जाती हैं।

अश्वगंधा की जड़ों में 0.13 से 0.31 प्रतिशत तक एल्केलॉइड की सांद्रता पाई जाती है। इसमें महत्वपूर्ण विदानिन एल्केलॉइड होता है, जो कि कुल एल्केलाॅइड का 35 से 40 प्रतिशत होता है।

*मेडिसिन है अश्‍वगंधा*

*1. कोलेस्ट्रॉल*
यह तो आप समझ ही गए हैं कि अश्वगंधा में एंटीआक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण मौजूद हैं। इस कारण से ही यह ह्रदय से जुड़ी तमाम तरह की समस्याओं को दूर करने में सक्षम है। अगर आप अश्वगंधा का प्रयोग करते हैं, तो ह्रदय की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। कई वैज्ञानिक शोधों में भी पुष्टि की गई है कि अश्वगंधा में भरपूर मात्रा में हाइपोलिपिडेमिक पाया जाता है, जो रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है ।
*2. अनिद्रा*
अगर आप नींद न आने से परेशान हैं, तो डॉक्ट की सलाह पर अश्वगंधा का सेवन कर सकते हैं। यह हम नहीं, बल्कि 2017 में जापान की त्सुकुबा यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट द्वारा किए गए एक रिसर्च में कहा गया है। इस अध्ययन के अनुसार, अश्वगंधा के पत्तों में ट्राइथिलीन ग्लाइकोल नामक यौगिक पाया जाता है, जो गहरी नींद में सोने में मदद करता है। इस रिसर्च के आधार पर कहा जा सकता है कि अनिद्रा के शिकार व्यक्ति को अश्वगंधा का सेवन करने से फायदा हो सकता है।
*3. तनाव*
आजकल जिसे देखो, वही तनाव में नजर आता है। इस कारण से हम न सिर्फ समय से पहले बूढ़े हो रहे हैं, बल्कि कई बीमारियों का शिकार भी बन रहे हैं। अगर आप इन सभी दुष्परिणामों से बचना चाहते हैं, तो तनाव और चिंताग्रस्त जीवन जीने का प्रयास करें। साथ ही अश्वगंधा का सेवन करें। यह आयुर्वेदिक औषधि आपके तनाव को दूर करने के लिए कारगर साबित हो सकती है। हालांकि, अभी तक वैज्ञानिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किन कारणों से अश्वगंधा में एंटी-स्ट्रेस गुण है, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि इसमें तनाव से राहत दिलाने के गुण हैं । *4. कैंसर*
यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी किस कदर गुणकारी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक दशक से डॉक्टर भी मानने लगे हैं कि अश्वगंधा से कई बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। यहां तक डॉक्टर कैंसर जैसी बीमारी के लिए भी अश्वगंधा को फायदेमंद मान रहे हैं। विभिन्न वैज्ञानिक शोध में कहा गया है कि अश्वगंधा में एंटी-ट्यूमर गुण है।
*5. डायबिटीज*
आप चाहे कैंसर की बात करें या फिर उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों की, आयुर्वेद में हर बीमारी का इलाज संभव है। उसी तरह डायबिटीज का इलाज भी आयुर्वेद के जरिए किया जा सकता है। आयुर्वेद में उल्लेख है कि जो अश्वगंधा का सेवन करता है, उसे जल्द ही डायबिटीज से राहत मिल सकती है।
*6 बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता*
यह तो आप भी जानते हैं कि अगर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही बेहतर नहीं होगी, तो विभिन्न प्रकार की बीमारियों का सामना किस प्रकार किया जा सकता है। अगर आप अपनी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर करना चाहते हैं, तो अश्वगंधा का सेवन करें। विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के जरिए स्पष्ट किया गया है कि अश्वगंधा खाने से शरीर में जमा विषैले जीवाणु बाहर निकल जाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है ।
*7. थायराइड*
गले में मौजूद तितली के आकार की थायराइड ग्रंथि जरूरी हार्मोंस का निर्माण करती है। जब ये हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं, तो शरीर का वजन कम या ज्यादा होने लगता है। साथ ही अन्य तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इसी अवस्था को थायराइड कहते हैं। अगर आप भी थायराइड से ग्रस्त हैं, तो आपके लिए यह जानना और भी जरूरी हो जाता है कि अश्वगंधा किस प्रकार आपके लिए लाभकारी है। थायराइड से ग्रस्त चूहों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि जब चूहों को नियमित रूप से अश्वगंधा की जड़ दवा के रूप में दी गई, तो उनके थायराइड हार्मोंस संतुलन होने लगे। इस आधार पर कहा जा सकता है कि थायराइड की अवस्था में डॉक्टर की सलाह पर अश्वगंधा का सेवन लाभकारी साबित हो सकता है ।

*8. आंखों की बीमारी*

आजकल लोग तेजी से आंखों से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जहां मोतियाबिंद जैसी गंभीर बीमारी 60 वर्ष के बाद लोगों को होती थी, वहीं अब 40 वर्ष के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं । कई लोग तो मोतियाबिंद से अंधे तक हो जाते हैं। इसी संबंध में हैदराबाद के कुछ वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन किया था। उनके अनुसार अश्वगंधा में एंटीऑक्सीडेंट गुण होता है, जो मोतियाबिंद से लड़ने में आपकी मदद कर सकता है। अध्ययन में पाया गया कि अश्वगंधा मोतियाबिंद के खिलाफ प्रभावशाली तरीके से काम करता है। यह मोतियाबिंद को बढ़ने से रोकता है ।

*9. आर्थराइटिस*

यह ऐसी पीड़ादायक बीमारी है, जिसमें मरीज का चलना-फिरना और उठना-बैठना मुश्किल हो जाता है। ऐसा लगता है कि मानो जोड़ जम गए हैं। इसी के मद्देनजर वैज्ञानिकों ने 2014 में अश्वगंधा पर शोध किया था। उन्होंने अपने शोध के जरिए बताया कि अश्वगंधा में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। अगर अश्वगंधा की जड़ के रस का प्रयोग किया जाए, तो न सिर्फ आर्थराइटिस से जुड़े लक्षण कम होते हैं, बल्कि दर्द से भी आराम मिलता है ।

*10. याददाश्त में सुधार*

इन दिनों हर कोई मल्टीपल काम कर रहा है और तनाव से भी घिरा हुआ है। परिणामस्वरूप, मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में जानवरों पर किए गए विभिन्न अध्ययनों में पाया गया कि अश्वगंधा ने मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और याददाश्त पर सकारात्मक तरीके से असर डाला। साथ ही अश्वगंधा लेने से नींद भी अच्छी आती है, जिससे मस्तिष्क को आराम मिलता है और वह बेहतर तरीके से काम कर पता है।

*11. मजबूत मांसपेशियां*

हड्डियों के साथ-साथ मांसपेशियोंं का मजबूत होना भी जरूरी है। अगर मांसपेशियां कमजोर होंगी, तो शरीर में भी जान नहीं रहेगी। साथ ही इससे अन्य तरह की परेशानियां भी हो सकती हैं। ऐसे में अगर अश्वगंधा का सेवन किया जाए, तो न सिर्फ मांसपेशियां मजबूत होती हैं, बल्कि दिमाग और मांसपेशियों के बीच बेहतर तालमेल बना रहता है। यही कारण है कि जिम जाने वाले और अखाड़े में अभ्यास करने वाले पहलवान अश्वगंधा के सप्लीमेंट्स खाते हैं ।

*12. संक्रमण*

अभी तक बताई गईं तमाम खुबियों के अलावा अश्वगंधा संक्रमण से भी निपटने में आपकी मदद करता है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की इंटरडिसिप्लिनरी बायोटेक्नॉलजी यूनिट ने इसी संबंध में एक अध्ययन किया था। उन्होंने अपने अध्ययन में पाया था कि अश्वगंधा में एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है। इसी गुण के कारण ही यह रोगजनक बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ने में सक्षम है । अश्वगंधा की जड़ और पत्तों के रस ने सफलतापूर्वक साल्मोनेला संक्रमण का सफाया कर दिया था। यह संक्रमण फूड पॉइजनिंग का कारण बनता है।

*13 ह्रदय रोग*

अगर आप ह्रदय रोग से पीड़ित हैं, तो अश्वगंधा के इस लाभ के बारे में जरूर पढ़ें। ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ने अपनी स्टडी में कहा है कि इस इंडियन जिनसेंग में ह्रदय रोग के असर को कम करने की शक्ति है। स्टडी के अनुसार, मरीज को नियमित रूप से अश्वगंधा की तय खुराक देने से कार्डियो एपोप्टोसिस (जरूरी सेल्स का नष्ट होना) के असर को कम किया जा सकता है। साथ ही मायोकार्डियम (ह्रदय के मजबूत व स्वस्थ टिशू) को फिर से क्रियाशील किया जा सकता है

*14. नियंत्रित वजन*

आजकल हर कोई चाहता है कि वो चुस्त-तंदुरुस्त और आकर्षक नजर आए। इसके लिए न सिर्फ स्वस्थ रहने की जरूरत है, बल्कि वजन भी संतुलित रहना जरूरी है। आयुर्वेद में कहा गया है कि दुबले-पतले लोगों को अश्वगंधा का सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से पाचन तंत्र अच्छा होता है और शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। ध्यान रहे कि अगर आप वजन बढ़ाने के लिए अश्वगंधा लेने की सोच रहे हैं, तो एक बार अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर कर लें ।

*15. एंटी एजिंग*

जैसा कि इस लेख के शुरुआत में बताया गया है कि अश्वगंधा में एंटीऑक्सीडेंट गुण होता है। इस लिहाज से यह आपके लिए काफी लाभकारी है। एंटीऑक्सीडेंट गुण के कारण ही यह शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ सकता है। ये फ्री रेडिकल्स सूरज की यूवी किरणों के कारण भी हमारे शरीर में बन सकते हैं और एंटी एजिंग का कारण बन सकते हैं। इतना ही नहीं, अश्वगंधा के प्रयोग से स्किन कैंसर से भी बचा जा सकता है ।

*16. घावों को भरने के लिए*

जब किसी को चोट लगती है, तो कुछ समय बाद वहां घाव बन जाता है, जो कभी-कभी बहुत तंग करता है। वहीं, किसी-किसी के शरीर में संक्रमण के कारण भी घाव हो जाता है, जिसे जल्द से जल्द ठीक करना जरूरी होता है। ऐसे में आप अश्वगंधा की मदद ले सकते हैं। घाव पर लगाते ही यह अपना काम शुरू कर देता है, क्योंकि इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। आप या तो इसका पेस्ट लगा सकते हैं या फिर तेल, यह आप पर निर्भर करता है।

*17. स्किन टोनर*

त्वचा को जवां और खूबसूरत बनाए रखने के लिए समय-समय पर टोन करने की जरूरत होती है। इसका महत्व हर महिला के लिए समझना जरूरी है। स्किन को टोन करने से त्वचा के रोम छिद्र साफ होकर सिकुड़ जाते हैं, ताकि फिर से उसमें गंदगी न जमा हो जाए। आपको पढ़कर हैरानी हो सकती है, लेकिन अश्वगंधा स्किन टोनर का भी काम करता है।

*18. त्वचा में सूजन*

यह तो आप जान ही गए हैं कि अश्वगंधा में पर्याप्त मात्रा में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इस लिहाज से यह आर्थराइटिस के साथ-साथ त्वचा में आई सूजन को कम करने में आपकी मदद कर सकता है। त्वचा में सूजन के लिए स्टैफिलोकोकस ऑरियस नामक बैक्टीरिया जिम्मेदार होता है। वहीं, अश्वगंधा जैसी चमत्कारी जड़ी-बूटी में विथेनाओलाइड्स नामक यौगिक पाया जाता है, जो एंटीबैक्टीरिया की तरह काम करता है।

*19. कोर्टिसोल के स्तर में कमी*

कोर्टिसोल एक प्रकार का हार्मोन होता है, जिसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है। यह हार्मोन आपके शरीर को बताता है कि आपको भूख लग रही है। जब रक्त में इस हार्मोन का स्तर बढ़ता है, तो शरीर में फैट और स्ट्रेस का स्तर भी बढ़ने लगता है। इससे शरीर को विभिन्न प्रकार के नुकसान हो सकते हैं। इसलिए, कोर्टिसोल के स्तर को कम करना जरूरी है। एक शोध में पाया गया है कि अश्वगंधा के प्रयोग से कोर्टिसोल को कम किया जा सकता है i

*20. स्वस्थ स्कैल्प*

काले, घने और लंबे बालों की चाहत हर किसी को होती है। यह तभी संभव है, जब स्कैल्प अच्छा हो। इसके लिए आप किसी दवा, शैंपू या कंडीशनर की जगह आयुर्वेद पर भरोसा कर सकते हैं। आयुर्वेद में कहा भी गया है कि अगर आप बेहतर बाल व स्वस्थ स्कैल्प चाहते हैं, तो अश्वगंधा का प्रयोग कर सकते हैं। इसके प्रयोग से स्कैल्प में रक्त का संचार बेहतर होता है। साथ ही हेयर फॉलिकल्स को पर्याप्त पोषण मिलता है, जिससे बाल जड़ों से मजबूत और मोटे होते हैं। इससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है

*21. मजबूत बाल*

ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो झड़ते बालों से परेशान हैं। ऐसा बालों के जड़ से कमजोर होने पर होता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो खास अश्वगंधा आपके लिए ही है। बाल न सिर्फ पोषक तत्वों की कमी के कारण झड़ते हैं, बल्कि इसके पीछे तनाव भी एक कारण है। जैसा कि पहले भी बताया गया है कि अश्वगंधा के प्रयोग से स्कैल्प बेहतर होता है और संपूर्ण पोषण मिलता है, उसी तरह यह कोर्टिसोल के स्तर को भी कम करता है।

*22. डैंड्रफ*

कुछ लोगों को डैंड्रफ की समस्या ज्यादा होती है। कई तरह के शैंपू, तेल व कंडीशनर इस्तेमाल करने पर भी समस्या दूर नहीं होती है। आप इन केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स की जगह अश्वगंधा का प्रयोग कर सकते हैं। इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होता है, जिस कारण से यह स्कैल्प से जुड़ी तमाम समस्याओं जैसे एग्जिमा, स्कैल्प सायरोसिस और डैंड्रफ आदि को ठीक करने में सक्षम है।

*23. बेहतर हेयर फॉलिकल्स*

हमारे स्कैल्प में कई हेयर फॉलिकल्स होते हैं, जो बालों को जड़ों से मजबूत बनाए रखने का काम करते हैं। इन फॉलिकल्स में कमी आने पर बाल टूटकर गिरने लगते हैं। इसलिए, आप केमिकल युक्त शैंपू की जगह अश्वगंधा युक्त शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल करें। इससे न सिर्फ हेयर फॉलिकल्स बेहतर होंगे, बल्कि बालों में भी नई जान आएगी और चमकदार नजर आएंगे।

*24. सफेद होते बालों से राहत*

यह हमारी असंतुलित दिनचर्या और खानपान का ही परिणाम है कि हम जल्दी बूढ़े हो रहे हैं। समय से पहले ही चेहरे पर झुर्रियां नजर आने लगती हैं और बाल सफेद होने लगते हैं। झुर्रियों से बचने का तरीका हम पहले ही बता चुके हैं। अब हम बात करते हैं सफेद बालों की। अगर आप चाहते हैं कि आपके बाल समय से पहले सफेद न हों, तो अश्वगंधा को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें। यह आयुर्वेदिक औषधि बालों में मेलेनिन के उत्पाद को बढ़ाती है।

*अश्वगंधा के नुकसान –*

– प्रेग्नेंट महिलाएं या वो महिलाएं जो स्तनपान कराती हैं, वो अश्‍वगंधा का सेवन न करें.

– ऑटोइम्यून डिसीज़ से पीड़ित लोगों को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

– जो लोग थायरॉइड की दवाइयां खा रहे हैं, उन्हें भी अश्‍वगंधा नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे थायरॉइड हार्मोन लेवल बढ़ सकता है. साथ ही इसके सेवन से ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. इसके सेवन से पहले डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि दवाओं का डोज़ बदलना पड़ेगा.

– अश्‍वगंधा की टैबलेट या पाउडर बिना डॉक्टरी सलाह के न लें.

– डॉक्टर के बताए अनुसार ही डोज़ लें. इसके ज़्यादा सेवन से डायरिया, उल्टी या पेट ख़राब हो सकता है.

अश्वगंधा को मूत्रवर्धक माना गया है, इसलिए कुछ मामलों में यह किडनी पर असर डाल सकता है।
अधिक मात्रा में लेने पर दस्त भी लग सकते हैं।
अश्वगंधा का सेवन जरूरत से ज्यादा करने पर पेट में ऐंठन जैसी समस्या हो सकती है।
आपकी अंग प्रत्यारोपण जैसी कोई सर्जरी होने वाली है, तो आप अश्वगंधा का सेवन बिल्कुल न करें। इससे आपके जल्द स्वस्थ होने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
अश्वगंधा का सेवन करने से कुछ लोगों को रक्तचाप असंतुलित होने की समस्या हो सकती है।
.गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इसके सेवन से गर्भ में पल रहे शिशु को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। साथ ही गर्भवती को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल जैसी समस्या हो सकती है।
जैसे कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, उसी प्रकार अश्वगंधा के नुकसान भी हैं। बेशक, अश्वगंधा को अधिक मात्रा में लेने के कोई घातक परिणाम नहीं होते, लेकिन छोटी-छोटी समस्या हो सकती हैं, जो आगे चलकर स्वास्थ्य को खराब कर सकती हैं।

प्रकृति ने हमें कई अनमोल उपहार दिए हैं और अश्वगंधा भी उन्हीं में से एक है। अगर इसका उपयोग समझदारी और डॉक्टर की सलाह पर किया जाए, तो यह आपके लिए अमृत समान साबित हो सकता है। आप तमाम तरह की बीमारियों से उबरने, शरीर में शक्ति बढ़ाने और वजन नियंत्रित करने आदि के लिए इसका सेवन कर सकते हैं। साथ ही जवां और खूबसूरत दिखने में भी यह औषधि आपकी मदद करेगी।

*रेकेमेंडेड लेख*

Call /whatsapp for good suggestion of अश्वगंधा :7792872528

Sunday, 19 May 2019

Why protein is important

*धीरे-धीरे आपको सफेद बाल, बीपी, फैटी लिवर, एनीमिया, गंजेपन जैसे 20 रोगों का मरीज बना देगी #प्रोटीन कमी*
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*प्रोटीन* तत्व की कमी से आपको वजन कम होना, मांसपेशियों का कमजोर होना, एडिमा यानी शरीर में सूजन होना, ब्लड प्रेशर कम होना, लिवर डिजीज, खून की कमी, इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होना, किसी भी चोट का बहुत धीरे-धीर सही होना, त्वचा, बाल और नाखून की समस्याएं होना, ब्रेन फोग होना और हड्डियों के फ्रैक्चर का खतरा हो सकता है। 

प्रोटीन शरीर के बेहतर कामकाज के लिए बहुत जरूरी है। प्रोटीन से शरीर की मांसपेशियों का गठन होता है और आपको पर्याप्त ऊर्जा मिलती है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बेहतर स्वास्थ्य और सेहत के लिए भोजन करना ही काफी नहीं, बल्कि उसमें पोषण होना भी बेहद जरूरी है। अच्छी सेहत के लिए जिस तरह पर्याप्त मात्रा में विटमिंस और मिनरल्स जरूरी हैं, उसी तरह से प्रोटीन भी बहुत जरूरी है. 
सवाल यह है कि रोजाना कितने प्रोटीन की जरूरत होती है?
प्रोटीन की आवश्यकता आपके भार और आपके कैलोरी इनटेक पर निर्भर करती है, जो कुल कैलोरी का 20 से 35 प्रतिशत प्रोटीन से आना चाहिए। यानि यदि आप हर दिन 2,000 कैलोरी लेते हैं, तो उसमें से 600 कैलोरी प्रोटीन से मिलना चाहिए।  
प्रोटीन की कमी से आपको वजन कम होना, मांसपेशियों का कमजोर होना, एडिमा यानी शरीर में सूजन होना, ब्लड प्रेशर कम होना, लिवर डिजीज, खून की कमी, इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होना, किसी भी चोट का बहुत धीरे-धीर सही होना, त्वचा, बाल और नाखून की समस्याएं होना, ब्रेन फोग होना और हड्डियों के फ्रैक्चर का खतरा हो सकता है।

*1) त्वचा, बाल और नाखून की समस्याएं*
प्रोटीन की कमी से त्वचा, बाल और नाखून प्रभावित हो सकते हैं। ये सभी काफी हद तक प्रोटीन से बने होते हैं। जब आप पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन नहीं करते हैं, तो इससे आपकी त्वचा पर लाल रंग के निशान आ सकते हैं। आपके नाखून भंगुर हो सकते हैं और आपके बाल पतले और उनका रंग फीका पड़ सकता है। इस तरह के लक्षण दिखने पर आपको सतर्क हो जाना चाहिए। 

*2) मांसपेशियों का कमजोर होना*
आपकी मांसपेशियां ज्यादातर प्रोटीन से बनी होती हैं और यदि आपका शरीर प्रोटीन की कमी वाला है, तो आप मांसपेशियों को खोने लगते हैं। वास्तव में, मांसपेशियों की हानि अपर्याप्त प्रोटीन के सेवन के पहले लक्षणों में से एक है। 

*3) हड्डी के फ्रैक्चर का खतरा*
प्रोटीन की कमी से आपकी हड्डियों को भी खतरा होता है। प्रोटीन हड्डियों की ताकत और घनत्व को बनाए रखने में मदद करता है। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त चीजों का सेवन नहीं करने से आपकी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।

*4) वजन कम होना*
जब आपको पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता है, तो इसका मतलब है कि आप पर्याप्त कैलोरी नहीं खा रहे हैं। इसका मतलब है कि आप खराब डाइट ले रहे हैं। यदि आप बहुत कम कैलोरी खाते हैं, तो आपका शरीर मांसपेशियों के निर्माण के बजाय ऊर्जा के लिए खाने वाले प्रोटीन का उपयोग करने लगता है जिससे आपका वजन कम होने लगता है। 
*5) इन्फेक्शन का खतरा*
अगर आप बार-बार बीमारी होते हैं, तो ऐसा प्रोटीन का कमी की वजह से हो सकता है। प्रोटीन की कमी से आपका इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होने लगता है जिससे आपका शरीर रोगों से लड़ने में नाकाम रहता है। यही वजह है कि आप बहुत जल्दी इन्फेक्शन का शिकार हो जाते हैं। 
*6) फैटी लिवर*
जब लि‍वर में गैर जरूरी फैट की मात्रा बढ़ जाती है, तो फैटी लिवर की समस्या सामने आती है। इससे आपका लिवर डैमेज हो सकता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि प्रोटीन की कामी के कारण आपको यह समस्या हो सकती है। हालांकि इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह शराब का अधिक सेवन है।

*7) बच्चों के विकास में बाधा*
प्रोटीन न केवल हड्डियों के द्रव्यमान और मांसपेशियों के निर्माण में मदद करता है, बल्कि शरीर के समग्र विकास के लिए भी आवश्यक है। शरीर के उचित विकास को सुनिश्चित करने के लिए बच्चों को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन देना बहुत जरूरी है। 
*8) एडिमा*
जब आप पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन नहीं करते हैं, तो आपको एडिमा का खतरा हो सकता है। इसका मतलब यह है कि आपके शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे आपका शरीर सूजने लगता है। प्रोटीन शरीर में तरल पदार्थ को कंट्रोल करता है, खासकर पैर और टखनों में। 
*9) बीपी कम होना*
शरीर में प्रोटीन की कमी होने से खून की कमी होने लगती है। शरीर के उत्तकों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलने या शरीर में फैट कम होने पर आप ब्रैडीकार्डिया का शिकार होने लगते हैं। इसका मतलब यह है कि आपकी हार्ट रेट कम हो सकती है या कम होकर 60 से 100 बीट्स प्रति मिनट तक जा सकती है।

प्रोटीन के लिए खायें ये चीजें
प्रोटीन विभिन्न खाद्य पदार्थों में पाया जा सकता है जिसमें सभी तरह की दालें, सीफूड्स, सोया,  बीन्स, दूध, पनीर, दही, बादाम, जई,  पनीर, ब्रोकोली, ट्यूना, क्विनोआ, मसूर, कद्दू के बीज, फ्लैक्ससीड्स, सूरजमुखी के बीज, शामिल हो सकते हैं।

*इस बात का रखें ध्यान*

अगर आपको ऊपर बताए लक्षणों में कोई भी महसूस होते हैं, तो पहले आपको अपनी डाइट में बदलाव करने चाहिए। अगर इसके बाद भी आपको फर्क महसूस नहीं हो रहा, तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।