Tuesday, 1 May 2018

वो कोई और नहीं मेरी माँ थी

 हेल्लो दोस्तों
लगभग 10 साल बाद वापस दोस्तों से बात चीतचित शुरू हो गई है और इसी बीच कईयों के शौक भी बदल गये हैं , स्कूल टाइम में हमारे साथ का ही मेरा बहुत करीबी दोस्त जिसके साथ कुछ समय तक स्कूल में टीचर भी रहा , आज उसके द्वारा लिखे इस कविता को आप सब के सामने प्रस्तुत करते हुए हम दोनों को बहुत ख़ुशी हो रही है . उम्मीद है आप सबको पसंद आएगी 


अगर कविता पसंद आई हो तो कमेंट करके हमें बतायें , और अपने मित्रों के साथ भी शेयर करैं 


by Ramesh Kumar Verma 
English Teacher at Khari, Bikaner, Raj

No comments:

Post a comment