Skip to main content

मृत्यु से भय कैसा

*मृत्यु से भय कैसा...  🤔*
*राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत पुराण सुनातें हुए जब शुकदेव जी महाराज को छह दिन बीत गए और तक्षक (सर्प) के काटने से मृत्यु होने का एक दिन शेष रह गया, तब भी राजा परीक्षित का शोक और मृत्यु का भय दूर नहीं हुआ। अपने मरने की घड़ी निकट आता देखकर राजा का मन क्षुब्ध हो रहा था।*

*तब शुकदेव जी महाराज ने परीक्षित को एक कथा सुनानी आरंभ की।*

*राजन! बहुत समय पहले की बात है, एक राजा जंगल में शिकार खेलने गया, संयोगवश वह रास्ता भूलकर घने जंगल में जा पहुँचा। उसे रास्ता ढूंढते-ढूंढते रात्रि हो गई और वर्षा होने लगी। राजा बहुत डर गया और किसी प्रकार उस भयानक जंगल में रात्रि बिताने के लिए विश्राम का स्थान ढूंढने लगा।*

*कुछ दूरी पर उसे एक दीपक जलता हुआ दिखाई दिया। वहाँ पहुँचकर उसने एक बहेलिये की झोंपड़ी देखी। वह बहेलिया ज्यादा चल-फिर नहीं सकता था, इसलिए झोंपड़ी में ही एक ओर उसने मल-मूत्र त्यागने का स्थान बना रखा था, अपने खाने के लिए जानवरों का मांस उसने झोंपड़ी की छत पर लटका रखा था।*

*वह झोंपड़ी बड़ी गंदी, छोटी, अंधेरी और दुर्गंधयुक्त थी। उस झोंपड़ी को देखकर पहले तो राजा ठिठका, लेकिन उसने सिर छिपाने का कोई और आश्रय न देखकर उस बहेलिये से अपनी झोंपड़ी में रात भर ठहरने देने के लिए प्रार्थना की।*

*बहेलिये ने कहा कि आश्रय के लोभी राहगीर कभी कभी यहाँ आ भटकते हैं। मैं उन्हें ठहरा तो लेता हूँ, लेकिन दूसरे दिन जाते समय वे बहुत झंझट करते हैं।*

*उन्हें इस झोंपड़ी की गंध ऐसी भा जाती है कि फिर वे उसे छोड़ना ही नहीं चाहते और इसी में ही रहने की कोशिश करते हैं एवं अपना कब्जा जमाते हैं। ऐसे झंझट में मैं कई बार पड़ चुका हूँ, इसलिए मैं अब किसी को भी यहां नहीं ठहरने देता। मैं आपको भी इसमें नहीं ठहरने दूंगा। राजा ने प्रतिज्ञा की, कि वह सुबह होते ही इस झोंपड़ी को अवश्य खाली कर देगा। यहाँ तो वह संयोगवश भटकते हुए आया है, उसे तो सिर्फ एक रात काटनी है।*

*तब बहेलिये ने राजा को वहाँ ठहरने की अनुमति दे दी, पर सुबह होते ही बिना कोई झंझट किए झोंपड़ी खाली करने की शर्त को दोहरा दिया। राजा रात भर एक कोने में पड़ा सोता रहा।*

*सोने में झोंपड़ी की दुर्गंध उसके मस्तिष्क में ऐसी बस गई कि सुबह जब उठा तो वही सबसे परम प्रिय लगने लगा। राजा जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूलकर वहीं निवास करने की बात सोचने लगा। और बहेलिये से वहीं ठहरने की प्रार्थना करने लगा।*

*इस पर बहेलिया भड़क गया और राजा को भला-बुरा कहने लगा।*

*राजा को अब वह जगह छोड़ना झंझट लगने लगा और दोनों के बीच उस स्थान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया।*

*कथा सुनाकर शुकदेव जी महाराज ने "परीक्षित" से पूछा, "परीक्षित" बताओ, उस राजा का उस स्थान पर सदा के लिए रहने के लिए झंझट करना उचित था?*

*परीक्षित ने उत्तर दिया, भगवन्! वह राजा कौन था, उसका नाम तो बताइये? मुझे वह तो मूर्ख जान पड़ता है, जो ऐसी गंदी झोंपड़ी में, अपनी प्रतिज्ञा तोड़कर एवं अपना वास्तविक उद्देश्य भूलकर, नियत अवधि से भी अधिक वहाँ रहना चाहता है। उसकी मूर्खता पर तो मुझे आश्चर्य होता है।*

*श्री शुकदेव जी महाराज ने कहा, हे राजा परीक्षित! वह बड़े भारी मूर्ख तो स्वयं आप ही हैं।*

*इस मल-मूत्र की गठरी "देह (शरीर)" में जितने समय आपकी आत्मा को रहना आवश्यक था, वह अवधि तो कल समाप्त हो रही है। अब आपको उस लोक जाना है, जहाँ से आप आएं हैं। फिर भी आप मरना नहीं चाहते। क्या यह आपकी मूर्खता नहीं है?"*

*राजा परीक्षित का ज्ञान जाग गया और वे बंधन मुक्ति के लिए सहर्ष तैयार हो गए।*

*"वस्तुतः यही सत्य है।"*

*जब एक जीव अपनी माँ की कोख से जन्म लेता है तो अपनी माँ की कोख के अन्दर भगवान से प्रार्थना करता है कि, हे भगवन् ! मुझे यहाँ (इस कोख) से मुक्त कीजिए, मैं आपका भजन- सुमिरन करूँगा। और जब वह जन्म लेकर इस संसार में आता है तो (उस राजा की तरह हैरान होकर) सोचने लगता है कि मैं ये कहाँ आ गया (और पैदा होते ही रोने लगता है) फिर धीरे धीरे उसे उस गंध भरी झोंपड़ी की तरह यहाँ की खुशबू ऐसी भा जाती है कि वह अपना वास्तविक उद्देश्य भूलकर यहाँ से जाना ही नहीं चाहता है।*

Comments

Popular posts from this blog

part time work online/offline

वर्तमान जीवन शैली और महंगाई के दौर के बावजूद हर युवा की चाहत होती है कि वे अपने सभी शौक पूरा सकें और खर्च खुद उठा सकें। उनको घर वालों से पैसे मांगने की जरूरत ही न पड़े। जब आप कॉलेज में हों तो पैसे कमाना और महत्वपूर्ण है। इन पैसों से आप मनचाहा उपभोग कर सकते हैं चाहे शॉपिंग करनी हो या दोस्तों के साथ पार्टी या फिर कोई गैजेट खरीदना चाहें। इसलिए, छात्रों के लिए कॉलेज के दौरान पार्ट-टाइम नौकरी का विकल्प ज्यादा मुफीद रहता है। इससे उन्हें कहीं ऑफिस भी नहीं जाना पड़ता और उनकी कॉलेज की पढ़ाई भी अनवरत चलती रहती है। साथ ही साथ यह अनुभव छात्रों को पढ़ाई के बाद फुल टाइम नौकरी दिलाने में भी मददगार होता है। ये नौकरियां पैसा और एक्सपीरियंस देने के अलावा अन्य पेशेवरों के साथ आपकी नेटवर्किंग और प्रभावशाली रिज्यूमे विकसित करने में मदद करती हैं। तो आइए जानते हैं कुछ प्रमुख क्षेत्रों के बारे में जहां आप पार्ट टाइम नौकरी कर सकते हैं।   डाटा प्रविष्टि (Data Entry) आजकल तकरीबन कॉलेज जाने वाले हर युवा के पास लैपटॉप या घर में कंप्यूटर तो होता ही है। ऐसे में डाटा एंट्री जॉब्स एक शानदार विकल्प हो सकता है। य...

आप अपना खुद का संसार रचते हैं

शायद मानव इतिहास कि महानतम खोज यह है कि आपके मस्तिष्क में आपके जीवन के लगभग हर पहलू का निर्माण करने कि शक्ति होती है | मानव  निर्मित जगत में आप अपने चारों ओर जो भी चीज़े देखते हैं, वह किसी इंसान के दिमाग में एक विचार के रूप में आई थी और उसके बाद ही  भौतिक जगत में साकार हुई | आपके जीवन कि हर चीज़ किसी विचार, इच्छा, आशा या सपने के रूप में शुरू हुई थी - या तो आपके दिमाग में या फिर किसी ओर के दिमाग में |                                     सभी धर्मो, सभी दर्शनों , मेटाफिजिक्स, मनोविज्ञान और सफलता का सार या है : आप जिसके बारे में जादातर वक्त सोचते हैं वाही बन जाते हैं | आपका बाहरी जगत अंततः आपके आतंरिक जगत का प्रतिबिम्ब बन जाता है | आपको वाही प्रतिबिम्ब दिखता हैं , जिसके बारे में आप जादातर वक्त सोचते हैं | आप जिसके बारे में लगातार सोचते हैं वह आपकी जिंदगी में प्रकट होता हैं |                                 ...

Guru Gobind Singh Quotes in Hindi

गुरु गोबिंद सिंह  के अनमोल वचन  खालसा  पंथ की स्थापना करने वाले सिखों के दसवें गुरु , गुरु गोबिंद सिंह एक महान योद्धा , कवी , भक्त एवं आध्यात्मिक गुरु थे | उन्होंने गुरु ग्रन्थ साहिब को पूर्ण कर उन्हें गुरु के रूप में सुशोभित किया |  उन्होंने जो बाते कही थी वे आज भी हम में ऊर्जा का संचार करती है- सवा लाख से एक लड़ाऊं  चिड़ियन ते मैं बाज़ तुड़ाऊं  तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊँ ||  1.  अगर आप सिर्फ भविष्य के बारे में सोचते रहेंगे तो वर्तमान भी खो देंगे |  2. जब आप अपने अंदर से अहंकार मिटा देंगे तभी आपको वास्तविक शांति प्राप्त होगी |  3. मैं उन लोगों को पसंद करता हूँ जो सच्चाई के मार्ग पर चलते हैं |  4. ईश्वर ने हमें जन्म दिया है ताकि हम संसार में अच्छे काम करें और बुराई को दूर करैं |  5. इंसान से प्रेम ही ईश्वर  की  सच्ची भक्ति है|  6. जो कोई भी मुझे भगवान् कहे वो नरक में चले जाए |  7. जब बाकी सभी तरीके विफल हो जाए तब हाथ में तलवार उठाना सही है |  8. हे ईश्वर   मुझे...